Sunday, August 28, 2016

Tuesday, August 16, 2016

“साईकिल फार फ्रीडम”


बालिका शिक्षा व बालिकाओ को सम्बल प्रदान करने के उद्देश्य से “साईकिल फार फ्रीडम” की शुरुआत मानवाधिकार जननिगरानी समिति व राजदुलारी फाउंडेशन द्वारा २०० स्वीडिश दान दातावो के सहयोग से पिछले वर्ष से शुरू की गयी थी | जिसके तहत अभी तक 80 लड़कियों को जो आर्थिक रूप से कमजोर थी लेकिन इसके बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखने के प्रति दृढ संकल्पित थी उनको साईकिल प्रदान की गयी | इसी क्रम में 16 अगस्त 16 को 5 लडकियाँ जिनमें सेक्सुअल एब्यूज (sexual abuse) एवं आर्थिक रूप कमजोर तबके की पीडिता हैं जिन्हें साईकिल प्रदान किया जायेगा |सेक्सुअल एब्यूज (sexual abuse) की पीडिता अपने साथ हुई इस दर्दनाक हादसे से उबरकर अपने आगे की पढाई जारी रख कर अपने साथ हुई घटना के विरोध में संघर्षरत हैं | ऐसे में मानवाधिकार जननिगरानी समिति इन बच्चियों के हौसले को सलाम करते हुए इनको सम्मानित कर इनके संघर्षो में खड़ा है और इनके न्याय की लडाई में अपना सहयोग दे रहा है|

यौनिक हिंसा पर लगातार अपने फोटोग्राफी व डाक्युमेंन्ट्री बनाकर यौनिक हिंसा की पीडिता के संघर्षों को लोगो के सामने लाकर उनको न्याय दिलाने में हमेशा संघर्षरत रहने वाली मशहूर फोटोग्राफर / पत्रकार सुश्री स्मिता शर्मा के सहयोग से मानवाधिकार जननिगरानी समिति द्वारा 5 साईकिलों का वितरण किया जा रहा है | स्मिता शर्मा ने 19 महीने लगातार कार्य करके उत्तर प्रदेश , तेलंगाना, झारखण्ड, हरियाणा, पश्चिमी बंगाल के 35 यौन हिंसा व बलात्कार के पीड़ितों पर फोटो डाक्यूमेंट्री तैयार किया है. स्मिता ने मानवाधिकार जननिगरानी समिति के वाराणसी, सोनभद्र, व जौनपुर के अनेको केसों का दस्तावेजीकरण किया |
स्मिता शर्मा ने यौन हिंसा की शिकार बच्चिवो के सहयोग के लिए kickstarer.com पर अभियान चला कर धनराशी एकत्र किया है. जिसके पहले चरण के तहत वाराणसी में भारत के स्वतंत्र दिवस के दिन बाद यह कार्यक्रम कामेश हट होटल जगतगंज में आयोजित किया गया है |
इस कार्यक्रम में महिला अधिकार पर एक दशक से ज्यादा सक्रिय मशहूर फोटोग्राफर श्री. रवि मिश्रा व मानवाधिकार कार्यकर्ता श्री. अमित सिंह को जनमित्र सम्मान से नवाजा जायेगा और देश में महिलाओ पर हो रहे अत्याचार व हिंसा के विरोध में जन जागरूकता के लिए राष्ट्रीय साईकिल यात्रा पर निकले श्री. राकेश कुमार सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे | इनके द्वारा 9 राज्यों में 28 महीनो से चल रहा है आज कल वाराणसी में है |
कार्यक्रम का सञ्चालन अनूप श्रीवास्तव ने किया और गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष डॉ महेंद्र प्रताप, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ लेनिन रघुवंशी आदि उपस्थित रहे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजीव सिंह ने किया |

Monday, August 15, 2016

Discrimination against Dalits in India- Can Social Movement Provides Solution?

Eminent Dalit rights activist Lenin Reghuvanshi has called for a neo-Dalit movement to overthrow feudalism, neo-fascism, neo-liberalism to establish a society based on equal dignity for human kind. To eliminate Caste system, Lenin has suggested the creation of a ‘Neo-Dalit’ movement– combining Shudras and ati-Shudras (untouchables of all kinds) from all regions, which would formulate popular movement against the ‘culture of impunity’ through mobilisation of opinion among leaders from all communities. Interestingly Neo-Dalit movement involves all progressive people from all sectors of life-who believe in social CHANGE. Lenin, argue that that social movements are the only solution, and stress the need for the change in attitude among the ruling classes. In his words, “Neo-Dalit movement will improve their (Dalits) political, economic and social conditions. First, we may fight against political repression and impunity by legal process. Secondly, the social impunity should be challenged by changing cognitive weakness (inferiority complex of Dalits), We need to create commons forums for Neo-Dalit, in order to break the wall of silence”.

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Friday, August 12, 2016

India: State of impunity

A crippled National Human Rights Commission (NHRC) and its state subsidiaries with limited recommendatory control and a dysfunctional Legal Aid System depict a gloomy picture indeed. In a system of defunct legal procedures, the economically weaker and socially backward sections often fall victim, languishing in legal tangles where only money talks.

#nhrc #pvchr #u4humanrights